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बुधवार, 30 सितंबर 2015

#TATASkyTransfer

जैक्सन हाइट-मानवीय भावनाओं का सम्प्रेषण

इन्सान के लिए जिन्दगी में रोटी,कपड़ा और मकान जीने के लिए जरुरी हैं और अब इसी जरुरत में जुड़ गया है “मनोरंजन”. क्या आपको नहीं लगता...? ऐसा...! अब इसके लिए आज के आईटी युग में बहुत सारे साधन हैं, जो आप हम सबको मालूम हैं, पर... जो सबसे सस्ता और सुलभ साधन है...वो है टी.वी. और आजकल तो टेलीविज़न, और अब तो आप टी.वी. अपने मोबाइल पर भी देख सकते हैं. हिंदी की मनोरंजन परोसने वाली चैनलों ने तो ट्रेफिक जाम करके रखा है. पर...इन चैनलों की भीड़ में भी हिंदी की एक चैनल ने अपना चेहरा भीड़ से बिलकुल जुदा रखा है. ये चैनल है “ज़ी” टेलीविज़न का पिछले ही साल लांच हुआ चैनल “जिन्दगी”. ये खासमखास चेहरा इसलिए बन गया है.

वास्तव में ‘जिन्दगी’ चैनल पर पाकिस्तान के जो भी सीरियल आ रहे हैं वे कहानी और उसके प्रस्तुतीकरण के लिहाज से बेहद सराहनीय हैं. कसी हुई पटकथा, कलाकारों का अभिनय, सामाजिक परिवेश सब इतने स्वाभाविक हैं की कहीं भी रचनात्मकता के साथ छेड़छाड़ की हुई दिखाई नहीं देती और भारतीय सीरियलों की तरह कृत्रिमता का बेहूदा डोज़ भी नहीं है. इन सीरियलों की कतार में एक सीरियल “जैक्सन हाइट” कुछ अलग हट कर है. 

“जैक्सन हाइट” न्यूयॉर्क का वो इलाका है, जहाँ अधिकतर एशियन रहते हैं, खासकर भारतीय और पाकिस्तानी.
ये सीरियल मुझे बेहद पसंद है, कारण इसमें मानवीय भावनाओं का सम्प्रेषण जिस तरह से किया गया है वो काबिले तारीफ है. कहानी चार लोंगों के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें खास बात ये है कि अमेरिका में बसने के प्रति जिस तरह से भारतीय और पाकिस्तानियों में क्रेज़ है और उसके लिए किसी भी हद तक जाने को लोग तैयार रहते हैं, उसको बेहद सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया गया है. 

मानवीय भावों में सबसे श्रेष्ठ भाव प्रेम का है. इमरान नामक पात्र अमेरिकन नागरिकता के लिए दो  बच्चों की अमेरिकन माँ से शादी करता है और इसी डर के साए में जीता है कि कहीं उसकी पत्नी उसे तलाक न दे दे, और वह उसे ‘देशी’ कहकर प्रताड़ित करती है. ये शब्द नस्लभेदी है और अमेरिका में रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानियों को स्थिति को रेखांकित करता है. इमरान भट्टी की टैक्सी चलाने के दौरान अमेरिका में रह रही पाकिस्तानी महिला सलमा से मुलाकात होती है, एक जो की एक ब्यूटी पार्लर में काम करती है. दोनों के बीच सहज मानवीय भावों का जिस तरह से आदान-प्रदान दर्शाया गया है उसमें छुपे प्रेम के भाव को दर्शक सहजता से लेता है और वो भाव इतना स्वाभाविक है कि उससे विवाहतेर संबंधों की बू नहीं आती, बल्कि इस बात को बल मिलता है कि प्रेम ऐसी अभिव्यक्ति है जिसे हम सीमाओं में नहीं बांध सकते बशर्त की वो सहज प्रेम का भाव हो. और परदेस में तो ये भाव और भी तीव्रता से व्यक्त होता है.

इसी कहानी में दो पात्र जमशेद जो इमरान का भांजा है और कराची से अपने मामा के पास आता है, उसके माता-पिता बचपन में ही गुजर जाते हैं और नानी और मामा के पास पल कर बड़ा होता है और जैसे-तैसे जोड़-तोड़ करके न्यूयॉर्क पहुँच जाता है और अपने मामा की असलियत जान जाता है, जिसने अपने घर कराची में यही बता रखा है कि उसकी स्वयं की टैक्सी कंपनी है और एक बड़ा सा घर है. ये हर उस भारतीय या पाकिस्तानी की कहानी है जो अमेरिका में रहकर अपनी छवि अपने लोगों के बीच बनाकर रखने को मजबूर है

इमरान जमशेद को अपने घर में नहीं रख सकता इसलिए वो उसे जैक्सन हाइट में रेस्टोरेंट चलाने वाली एक पाकिस्तानी महिला मिशेल से एक कमरा किराये पर देने का इसरार करता है. मिशेल बेहद सख्त महिला है और वो बड़ी मुश्किल से मानती है. टूरिस्ट वीसा पर अमेरिका आये जमशेद को वर्क परमिट नहीं होने पर उसे काम नहीं मिल सकता. पर... वो तो अमेरिका की नागरिकता के ख्वाब लेकर आया था, उसे यहाँ आकर निराशा होती है और वो वापस नहीं जाना चाहता. उसे मिशेल अपने रेस्टोरेंट में अनधिकृत तौर पर काम करने की इजाजत दे देती है. मिशेल का १५ साल पहले तलाक हो चुका है और वह किसी के भी साथ कठोरता से पेश आती है उसका मानना है की पाकिस्तानी मर्द भरोसे के काबिल नहीं, पर धीरे-धीरे वह जमशेद पर भोरसा करने लगती है. जमशेद उससे प्यार का इजहार कर देता है जिसे वह स्वीकार नहीं कर पाती, क्योंकि दोनों में १५ साल का अंतर है. जबकि जमशेद जा मानना है कि प्यार में उम्र के लिए कोई स्थान नहीं, वह शायद...मिशेल से इसलिए प्यार कर बैठता है क्योंकि जीवन में माँ के अभाव ने उसे प्रेरित किया हो...जो भी हो अभी कहानी आगे आना बाकि है.
इस तरह का मनोरंजन कोई भी छोड़ना नहीं चाहेगा. पर अपनी व्यस्तता के चलते मै इस सीरियल की एक भी कड़ी मिस नहीं करना चाहती हूँ. और ऐसे में विकल्प के रूप में  #TATASky Transfer मेरे लिए हवा के झोंके की तरह आया है. अब मै आराम से प्रोग्राम को रिकॉर्ड कर अपने मोबाइल में ट्रान्सफर कर कभी भी देख लिया करुँगी. मै # TATA Sky Transfertata को धन्यवाद देना चाहती हूँ कि उसने मेरे पसंदीदा सीरियल को सहेजने का मौका मेरे लिए उपलब्ध करवा दिया.

http://www.tatasky.com/transfer/



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रविवार, 22 मार्च 2015

#StartANewLife-ये कहानी



उसकी की ये कहानी 

#StartANewLife में एक ऐसे इन्सान की कहानी शेयर कर रही हूँ जिसने वास्तव में अपनी जिंदगी को फिर से एक नई शुरुआत दी.ये कहानी उसकी की है. उसका को भी नाम हो सकता है, पर मै यहाँ उसे उसकी ही कहूँगी. वो उसकी मै भी हो सकती हूँ, क्योंकि हर नारी चेहरा अलग-अलग हो सकता है पर उसकी भावनाएं और संवेदनाएं एक जैसी ही होती हैं.
उसकी के भी सपने थे जैसे की आजकल की युवा होती जेनरेशन के होते हैं, पुरानी जेनरेशन की भी आँखों में सपने हुआ करते थे जब वे अपनी युवाअवस्था में रही होंगी. लगता है मै थोड़ा बहक गई हूँ पर इसमें मेरा को कसूर नहीं है क्योंकि जब भी गुज़िश्ता वक्त की बातें हम करते हैं तो हमारी आँखों के सामने हमारे माता-पिता का माज़ी आ जाता है. एयर यकीनना उनकी आँखों में जो सपने हुआकरते थे उसकी कौंध आज भी यदा-कदा उनकी आँखों में दिख जाती है. आखों को सपने देखने का हक़ तो है ही,बेशक उन्हें पूरा करने उनके इख़्तियार में हो या न हो.

तो मै बात कर रही थी उसकी की. वह भी और लड़कियों की तरह करियर माइंडेड लड़की है. उसने एम.बी.ऐ. की डिग्री Symbiosis  simbiosiपुणे से की और उसी दौरान उसे जॉब भी मिल गया. एक अच्छे पैकेज के साथ उसने अपने सपनों के शहर मुंबई में कदम रखा. अपने सपनों को मुक़म्मल हकीकत का अमलीजामा पहनाने वाली उसकी के लिए मानों जिंदगी सौगातों की बौछार कर रही थी. एक साल के बाद उसे प्रमोशन मिला और एक नई जगह याने आमतौर पर लोगों के लिए सपनों का देश कहलाने वाले अमेरिका में उसके कदम पड़े. कुछ और समय बीता तो उसकी के माता-पिता के उसके विवाह की चिंता सताने लगी और उसकी से उसकी पसंद पूछी गई तो उसने अपने माता-पिता पर छोड़ दिया. अब तो उसके मम्मी-पापा के लिए एक मुश्किल काम आ गया था, उन्हें लगा कि इतनी ब्रिलियंट लड़की के लिए आराम से उसके अनुकूल वर मिल जायेगा. पर... वे शायद भूल गए थे कि वे भारत जैसे देश में रहते हैं, जहाँ पर कन्या कितनी भी गुणी हो और अपने पैरों पर खड़ी हो पर उसका लड़की होना ही उसके सारे गुणों को अवगुणों में बदल देता है. उसकी के माता-पिता की इस जमीनी हकीकत ने आसमान से जमीं पर ला दिया, पर... कहते हैं न की इस धरती पर हर एक का जोड़ा बना है सो उसके लिए भी रोहित के रूप में उसका लाइफ पार्टनर आया. अपने समाज और जाति में लड़का मिलना और वो भी उसकी जैसी  लड़की के लिए, ये सोने पर सुहागा जैसा लग रहा था.
उसकी की ये कहानी ऐसा लगता है मानो एक शानदार जिंदगी का आगाज लगती है पर उसे नहीं मालूम था कि इसी शुरुआत में उसकी जिंदगी जहन्नुम बन जाने वाली थी और वो भी जल्दी ही. रोहित उसकी जिंदगी में एक शीतल बयार बनकर नहीं बल्कि कहर बनकर आया था. वो एक निहायत ही दरिंदा टाइप का इन्सान निकला उसने उसके वजूद को तार-तार कर दिया. कहने को तो रोहित की शख्सियत बेमिसाल थी कोई भी लड़की उसे अपने हमसफ़र के तौर पर पाकर रश्क कर सकती थी पर अपने भीतर वो हैवानियत की जिन्दा मिसाल था . उसकी जो अपने माता-पिता और उसके जानने वालों के लिए एक मिसाल थी और उनकी आँखों का तारा थी, जल्दी ही अपने बिखरे वजूद को लिए अमेरिका से लौट आई. उसकी आँखों में आंसू मानो घर बना चुके थे.
अपने अस्तित्व के टुकड़े समेटे अपने माता-पिता के साथ रहने लगी. उसकी जिंदगी में मानो अभी और भी सैलाब आना बाकि था. माता-पिता जहाँ उसे सांत्वना दे रहे थे और कुछ शुभचिंतक उसके दुःख को कम करने की कोशिश में लगे थे वही कुछ सामाजिक चेहरे ऐसे भी थे जो उसके चेहरे पर दर्द की लकीरों का स्थायी बसेरा चाहते थे. प्रायः लोगों की व्यंग्य भरी भाषा और टीका-टिप्पणी से उसकी तकलीफ और भी बढ़ जाती थी. उसकी धीरे-धीरे अपने दर्द से उबरने लगती है और उसके माता-पिता उसे उस तकलीफ से बाहर निकालने की सोचते हैं और तलाक के लिए कोर्ट में केस लगाते हैं.
जिंदगी कभी रूकती नहीं और उसकी भी जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी और उसका आत्मविश्वास लौटने लगा. उसकी जिदगी के रूटीन में शाम की सैर भी शामिल थी और वो अब अक्सर सैर पर भी जाने लगी. उनका घर एक बेहद पोश कॉलोनी में है और सुबह या शाम की सैर का एक अलग ही आनंद होता है. आज भी उसकी अपनी माँ के साथ शाम की सैर पर निकली ही थे की उनकी एक परिचित किसी महिला के साथ घूम रही थी, ने उसकी की तरफ इशारा करके कहा कि यही वो लड़की है जिसे उसके पति ने छोड़ दिया...
उसकी ने जैसे ही ये सुना, वो कुछ कदम आगे बढ़कर उस परिचित महिला के सामने पहुच गई और बेहद शांत स्वर में बोली, आंटी...! आप गलत बोल रही हैं, उसने मुझे नहीं छोड़ा बल्कि मैंने उसे छोड़ा है ...आप ये इलसिए नहीं समझ सकती क्योंकि आप की बेटी के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ...
उसकी के इन शब्दों ने ही मुझे ये ब्लॉग लिखने के लिए प्रेरित किया. मुझे उसमे भारत की उस बेटी की झलक मिल रही थी जिसे आज के भारत को जरुरत है.
आप  सब ये तो जानना चाहेंगे कि आज उसकी कहा है...? आज उसकी फिर से अपनी जिंदगी में लौट चुकी है, न हार मनाने वाली, जिंदगी में आगे बढ़ने वाली उसकी आज ऑस्ट्रेलिया में एक नई जॉब के साथ फिर से जिंदगी की एक नई शुरुआत कर रही है.

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