सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

Cashify.in contest #CleanUpCashOut



उफ़...!बीबी का मायके जाना..

Cashify.in ने #CleanUpCashOut कांटेस्ट से जहाँ कुछ नगदऊ कमाने की जुगाड़ बैठा दी वहीँ हमारे अतीत के अँधेरे में गुम कुछ खुबसूरत जुगनुओं को भी ढूँढने की जहमत उठाने का मौका दिया. बात तो आज भी जैसे कल की ही लगती है, आज भी सोचते हैं तो कलेजा मुँह को आता है. भाई...! अब आप ही सोचें कि एक अदने से मोबाइल के लिए तो हम अपनी बीबी छोड़ने से रहे...!!!. आप भी सोच रहे होंगे...!; ऐसा क्या हुआ होगा ...?, और बीबी का भला mobile से क्या connection...? जरा... धीरज धरें...! अभी आपको सारी बात पता चल जाएगी. 

  बात कोई दो-एक साला पुरानी है जब स्मार्ट फोन ने हमारी जिंदगी दस्तक दी थी. हमारे पास एक अदद सा Android fone हुआ करता था और जिसे हम अपने हाथों में बड़ी अदा से flaunt किया करते थे. और करते भी क्यों न...! वो अपने समय का सबसे smart फोन हुआ करता था… पर.. जल्दी ही I Phone के आने से हमारी जिंदगी बदल जाने वाली थी इसका हमें पता ही नहीं था. I फ़ोन का बुखार हमारी बीबी पर किस कदर चढ़ चुका है ये हमें उस दिन पता चला, जब एक दिन सुबह हमारी श्रीमतीजी ने हमें बड़े प्यार से पुकारा, " ऐ जी...सुनिये ना...!" उनके इस प्यार भरे बोल ने हमारे दिल की धड़कन बढ़ा दी; हमें लगा कि क़यामत हमारे करीब ही है. उन्होंने जब भी हमें प्यार से पुकारा, हमारी जेब पर गाज गिरी है. उन्होंने हमारा हाथ पकड़ कर हमें सोफे पर बिठाया और हम भी मंत्रमुग्ध से उनके हो लिए और जाकर सोफे पर बैठ गए. जनाब...! आप भी समझ सकते हैं कि बीबी की पकड़ से बड़े-बड़े महापुरुष नहीं बच पाए फिर हम तो अदना से इन्सान थे.

उन्होंने माथे पर पड़ी हमारी जुल्फ प्यार से पीछे किया तो हमारा कलेजा मुँह को आ गया. " आप कितना काम करते हैं और थक जाते हैं..., देखिये न...! आपका चेहरा कितना दुबला हो गया है...", ये सुनकर हम अपने चेहरे पर हाथ फेरने लगे.
 " अरे...! आप ऐसा करें थोड़ा रिलेक्स करने के लिए कुछ लाइट म्यूजिक या गाने सुन लिया करें या फिर कोई funny video ही देख लिया करें..." अपनी श्रीमतीजी के मुखारविन्द से अपने लिए चिन्ता देखकर हमारा दिल बल्लियों उछलने लगा, पर अन्दर ही अन्दर हमारा दिल अब शंकित हो चला था कि आज सूरज आखिर पश्चिम से कैसे निकला है...? " आप ऐसा क्यों नहीं करते...?" उनके इस दिलफरेब सवाल से लगा मानों हमारे दिल की धड़कन ही रुक जाएगी.
 " आप एक नया mobile ले लें...जिसमें आप अपनी पसंद के गाने भरवा के सुनना.." उनकी ये चाहत सुनकर हम चकरा गए. आज हम जान पायें कि वे हमें कितना चाहतीं हैं और हमारी कितनी चिंता करती हैं. इस ख़ुशी में डूब-उतर रहा  हमारा दिल " आह और वाह " दोनों कर उठा. उनके बरसने वाले प्यार का राज हम जान पाए. यानी हमारी जेब पर डाका ऐसे नहीं तो वैसे पड़ ही चुका था. वे तो मानो आज हमें तन्हा छोड़ना ही नहीं चाहती थीं.
 " रूपल (हमारा बेटा)... बता रहा था कि आजकल एप्पल का I फ़ोन होना चाहिए...", ये सुनकर हमारी धड़कन ने तो मानों धड़कना ही बंद कर दिया, हमारा दिल हमारे हलक में आकर अटक गया. ये तो सरासर दिन दहाड़े डाका पड़ने वाली बात हो गई थी. पर अब ऐसा तो हो नहीं सकता था कि हम श्रीमतीजी को ignore कर देते, हमारी शामत तो आई नहीं थी जो हम ऐसा करते. अब दिल पर पत्थर रखकर हमने अपनी सेविंग्स में से बहुत सारे हजार रुपयों को निकलने की सोची.
 हमारी पत्नीजी हमसे बड़े प्यार से पूछ रहीं थीं कि हम पुराने पड़ चुके मोबाइल का क्या करेंगे...?" ऐसा करो डार्लिंग...!", हमने उनकी ओर प्रश्न सूचक निगाहों से देखा- " रूपल बता रहा था कि पुराना फोन ऑनलाइन बड़े अच्छे दाम पर बिक जाता है.. अरे वो मुई भूल गई...! बड़ी अच्छी सी साईट का नाम ले रहा था...कोई ओले नाम की साईट ...", वे थोड़ा सोचते हुए बोलीं. हम समझ गए वे !!! साईट की बात कर रहीं थीं. अब जब सिर ओखली में गया है तो मूसल से क्या डरना, सोचकर !!! पर अपने एक साला अदद से smart मोबाइल को बेचने के लिए उसकी खूबियों सहित डाल दिया


  शाम होते न होते हमारे मोबाइल पर एक अन्जाना सा नंबर चमका. उधर से एक बड़ी ही संगीतमयी हेलो सुनाई दी. हमारे दिल की वीणा के तार झनझना उठे. " आप पवनजी बोल रहे हैं...? " वे मोहतरमा हमसे पूछ रहीं थीं. 'पवनजी' शब्द से हमारी जो उन्होंने इज्जत आफजाई की थी उससे तो लग रहा था कि वे बोलतीं रहें और हम सुनते रहें. हम थोड़ा सम्हले. " जी...मै पवन बोल रहा हूँ...! आप कौन मोहतरमा बोल रहीं हैं...?"
" जी बात ये है कि आपने !!!.com पर अपने फोने को बेचने के लिए ad दिया है... मै उनके ही बारे में बात करना चाह रही थी. बाय द वे मेरा नाम संगीता है..." उसके बाद उन्होंने क्या कहा हम उनकी आवाज के तर्रनुम में इतना खो चुके थे कि भूल ही चुके थे कि वे हमसे किस बारे में बात कर रहीं हैं.
 " अच्छा तो बताइए कि आप अपना मोबाइल कितने में बेचेंगे...?" वे पूछ रहीं थीं.
 हमने अचकचाकर बोल उठे, " जी आज जरा बिजी हूँ... आपको कल बताता हूँ." 

 " जी... ठीक है..." कहकर उन्होंने फोन काट दिया और हम उनकी आवाज में डूबते-उतरते ही रहते अगर हमारी श्रीमतीजी की कर्कश आवाज ने हमें वर्तमान में लाकर खड़ा न कर दिया होता. हमने सावधानी से संगीता का नाम एस नाम से save कर लिया और दिल ही दिल में ये ठान लिया कि हम अपना फोन अपनी 'एस' को ही बेचेंगे. पत्नी ने हमसे पूछा कि किसका फोन था तो हमने दोस्त का बताकर टाल दिया. अगले दो दिनों में बहुत सारे कॉल फोन को खरीदने के लिए आये पर नहीं आया तो वो कॉल जिसका हमें नींद में भी इन्तजार रहता था, अब तो हमारी बेकरारी बढ़ने लगी और हम से रहा नहीं गया और सुबह उठकर जैसे-तैसे तैयार होकर ऑफिस के लिए घर से बाहर निकले तो कार में बैठते ही सबसे पहले हमने 'एस' को फोन लगाया और जब रिंग जाने लगी तो हमारे दिल की धड़कन भी वैसे-वैसे तेज  होने लगी. आख़िरकार कुछ सेकंड जो की हमें सदियों से लग रहे थे, के बाद उन्होंने फोन उठाया उनकी हेलो ने हमें ऊपर से नीचे तक हिला दिया. हमने उन्हें बताया कि हम फोन बेचने के लिये तैयार हैं. पर... इसके लिए उन्हें पहले हमसे मिलना पड़ेगा. उनके क्यों के सवाल पर हमें उन्हें समझाना पड़ा कि वे फोन एक बार तो देखना चाहेंगी जिससे उन्हें खरीदने में आसानी होगी. वे इस बात से सहमत थीं. हमने उन्हें दूसरे दिन शहर के नामी-गिरामी रेस्टोरेंट में मिलने का समय दिया और ऑफिस से घर लौटते समय अपनी श्रीमतीजी के पसंद के रसगुल्ले ले जाना न भूले. और कोई दिन होता तो शायद हम उनके बार-बार कहने पर भी उनकी फरमाइश भूल जाया करते थे. पर...आज जब हम लेकर गए तो उन्होंने हमें बड़ी ही ताड़ने वाली नजरों से घूरा और हम उनकी नजरों से बचते हुए ये कहकर बाथरूम में घुस गए कि फ्रेश होकर आते हैं. असल में हम कल उनसे मिलने की ख़ुशी को अपनी श्रीमतीजी की नजरों से बचाकर रखना चाहते थे, इसी कारण से हम बाथरूम की शरण में थे और 'एस' से मिलने के ख्यालों में अभी डूब-उतर ही रहे थे कि बाथरूम के दरवाजे पर जोर-जोर की थाप पड़ने लगी. 

   दरवाजे के दूसरी तरह से श्रीमतीजी दे दहाड़ने की आवाज सुनाई दी, " जरा...जल्दी से बाहर निकलो..!" हमारा दिल हलक में आ गया और डरावने से ख्याल दिल में आने लगे कि अचानक 5 मिनिट में ऐसा क्या हो गया...? एक अनजानी सी आशंका से हमने फट से बाथरूम का दरवाजा खोला. और दरवाजे का खुलना हुआ कि मानों बम फटा, " कौन है ये 'एस'...?", श्रीमतीजी के इस सवाल से हमें जनवरी के महीने में भी पसीना आ गया. हम सम्हलते इससे पहले ही उनका दूसरा सवाल हमारी तरफ बम के गोले की तरह आया-" कौन है ये चुड़ैल...? कब से चल रहा है ये चक्कर...? तभी तो मै कहूँ आज सूरज पश्चिम से कैसे निकला...? जो तुम मेरे लिए रसगुल्ले ले कर आये हो...?", हमारी तो सांप छछूंदर वाली हो चुकी थी. अब हम कैसे उन्हें 'एस' वाली बात बता सकते थे. हम उन्हें लाख सफाई देते पर वे हमारी बात पर विश्वास नहीं करने वालीं थीं, ये बात हम जानते थे. हम उस घड़ी को कोस रहे थे जब हमने 'एस' का नंबर अपने मोबाइल में save किया था.
 अब कहने को कुछ भी नहीं बचा था और उसके बाद घर में जो महाभारत हुई उसके नतीजे में हमारी श्रीमतीजी पिछले 4 महीनों से मायके में जाकर बैठीं हैं.


 घर में अपने माता-पिता से जो रोज हमें लानत मिलती है वो हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते. हमारा एकलौता बेटा हमें अपना प्रतिद्वंदी समझने लगा है. एक दिन हमने उसे बड़बड़ाते हुए सुन लिया, " बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम... हमारे दिन हैं girlfirend बनाने के और इन्हें इश्क सूझ रहा है...!!" अब आप ही बताएं हमारे दिल पर क्या गुजर रही है. केवल इतना ही कह सकते हैं, " बात इतनी सी थी पर... दूर तक चली गई..." खैर...! हमारी सलाह माने तो कोई भी सेकंड hand मोबाइल या laptop बेचने की सोचें तो हमारे जैसी गलती भूल से भी भूल कर न करें.  जय....जय.....    (वीणा सेठी)
(all images from google.com)



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