शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

#CeleberatingSuper दे रहा है मौका...पर्यावरण बचाने का....



अपना personal Eco-System

         इस बार दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने Delhi-NCR में फटाखों पर पूरी तरह से ban कर दिया था और हुआ क्या ..? जैसा कि हम भारतीयों की आदत है हम कानून की धज्जियां उड़ाने में हमेशा आगे रहे हैं, इसलिए दीवाली पर Delhi-NCR में पटाखों की जमकर धुलाई की और देश की सबसे बड़ी अदालत की पर्यावरण के प्रति गंभीर चिंता मखौल उड़ाया गया. दिल्ली की हवा कितनी प्रदूषित हो चुकी है, ये सब जानते हैं और मानते भी हैं पर... किसे परवाह ? गंगा मैया जैसे हमारे पाप धोती है वैसे ही जमुना मैया हमारे पर्यावरण को सम्हाल लेंगी. बेहद शर्मनाक है की हम हमारे देश के कानून का सम्मान नहीं करते और शायद दिमागी तौर पर भी इतने दिवालिया हो चुके हैं कि अपने अस्तित्व के प्रति भी संवेदनशील नहीं रहे. शायद ये हमारी केकड़ा प्रवृति ही है जो ये सोचने पर मजबूर करती है कि "सनम हम तो डूबेंगे और तुम को भी ले डूबेंगे". " कुछ तो शर्म करो...!" अपना न सही तो अपनी आने वाली पीढ़ी का ख्याल कर लो... उन्हें विरासत में क्या प्रदूषित वातावरण दे कर जाओगे.. जिसमें सांस लेने के साथ ही उनके अन्दर कई बिमारियों का भी बसेरा होगा".#CeleberatingSuper दे रहा है मौका...पर्यावरण बचाने का.

  का   बहुत दूर जाने की भी जरुरत नहीं है, केवल थोड़े सी कोशिश से ही हम अपने environment को बचा सकते हैं और इन छोट-छोटे प्रयासों का मिलाजुला रूप ही एक बड़े प्रयास को जन्म देगा. केवल हमें इतना करना है कि हमें अपने personal eco-system को बनाना होगा. "अब आप सोच रहे होंगे...? eco system तो सुना है पर ये personal eco-system क्या है...?" तो चलिए ये भी बता देते हैं...! आप Eco System से तो वाकिफ़ ही होंगे. अगर नहीं हैं तो ये भी बता देते हैं ताकि आप हमारी बात को बेहतर ढंग से समझ सकें. पेड़-पौधों और जीवित प्राणियों का एक क्षेत्र की जलवायु और वहाँ के पर्यावरण के साथ तालमेल बैठा कर जीना. याने हर स्थान का अपना एक eco system हो सकता है और ये सब मिलकर एक बड़े eco system को बनाते हैं. इसी तरह से हम एक personal eco system को develop कर सकते हैं और ये हमारे घर और घर के आसपास को मिलाकर बनता है याने आप के घर की boundry wall के भीतर eco system बिल्कुल आपका personal होगा.
कुछ उपाय तो बेशक पढ़ने में नए नहीं लगेंगे पर इन्हें एक बार फिर से देखने पर शायद कुछ याद आ जाये कि आप क्या मिस कर रहे हैं :-
# घर paint करते समय latex paint का उपयोग करें.
# एक tune-up प्राप्त कें. इससे आपके वाहनों को बेहतर mileage मिलेगी और pollutants कम उत्सर्जित होंगे.
# अपने गैस टैंक को ऊपर से न बंद करें.
# अपने घर के yard कचरा न जलाएं.
# उर्जा की बचत कर्रें.
# घर में पेड़-पौधे लगायें.
# घर में chemicals और pesticides का इस्तेमाल न करें.
# waste products को अधिक से अधिक recycle करें.
  ये तो हुआ व्यक्तिगत तौर पर अपने personal eco system को बचाने के कुछ उपाय. पर अब एक बात और भी बतानी है, वो ये कि अगर हमारे घर का वातावरण polluted है तो उसे clean और purify करना भी हमारा कर्तव्य है. इसके लिए भी कुछ रामबाण उपाय हैं. " चौंक गए न...! अरे जनाब चौंकने की जरुरत नहीं है.. आप भी जानते हैं की प्रकृति के पास हर तरह के उपाय मौजूद हैं ...बस... जरुरत उसे समझने और पहचानने की है. चलिए... आपकी ये परेशानी भी दूर किये देते हैं... आपको कुछ ऐसे plants से मिलवाते हैं जो हमारे पर्यावरण याने हमारे personal eco system को बचाने में हमारी दिल खोल के मदद करेंगे..."
" चलिए...! आपको इनसे रूबरू करवाया जाये....:-
* Alovera - ये घर के लिये बेहद ही फायदेमंद plant है. इसके medicinal फायदे तो जगजाहिर हैं. पर  ये वातावरण से carbon di oxide और carbon monoxide को absorb करता है और हवा को शुद्ध करता है. नौ air purifyres का काम एक एलोवेरा का plant करता है.

* Fikus- इसके देखभाल आसानी से की जा सकती है. और ये कम रौशनी में भी पनप सकता है. ये बड़ी ही सरलता से हवा में मौजूद formaldehyde को साफ़ कर हवा को शुद्ध कर देता है. पर इसे बच्चों और pets से दूर रखें क्योंकि इस्मेमं poison हो सकता है.



*Ivy- ये बिल्कुल जरुरी herb है. ये हवा से 58% feces particles और 60% toxins को 6 घंटे में दूर कर देता है. हैं न कमाल का herb....!!!

*Spider plant- ये कमाल का plant है. ये हवा से carbon di oxide, carbon monoxide, gasoline, formaldehyde और styrene को सोख लेता है और आपके घर की हवा को clean और शुद्ध कर देता है.




* Snake Plant- ये plant bed roomमें जरुर रखें क्योंकि ये रात के समय oxygen produce करता है. ये कम रौशनी में भी photosynthesis करता है.





* Peace Lilies- ये हवा से toxins को remove करता है. और हवा से formaldehyde, trichloro
ethylene को भी निकाल कर हवा को शुद्ध करता है.




अब देख लीजिये इतना कुछ है आपके पास अपने personal eco system को बचाने और इस मिलेजुले हमारे प्रयास हमारे environment को भी pollution से बचायेंगे. तो... देर किस बात कि आज से ही क्यों न शुरू किया जाए.... (वीणा सेठी)

https://www.vodafone.in/home-delhi 

सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

Cashify.in contest #CleanUpCashOut



उफ़...!बीबी का मायके जाना..

Cashify.in ने #CleanUpCashOut कांटेस्ट से जहाँ कुछ नगदऊ कमाने की जुगाड़ बैठा दी वहीँ हमारे अतीत के अँधेरे में गुम कुछ खुबसूरत जुगनुओं को भी ढूँढने की जहमत उठाने का मौका दिया. बात तो आज भी जैसे कल की ही लगती है, आज भी सोचते हैं तो कलेजा मुँह को आता है. भाई...! अब आप ही सोचें कि एक अदने से मोबाइल के लिए तो हम अपनी बीबी छोड़ने से रहे...!!!. आप भी सोच रहे होंगे...!; ऐसा क्या हुआ होगा ...?, और बीबी का भला mobile से क्या connection...? जरा... धीरज धरें...! अभी आपको सारी बात पता चल जाएगी. 

  बात कोई दो-एक साला पुरानी है जब स्मार्ट फोन ने हमारी जिंदगी दस्तक दी थी. हमारे पास एक अदद सा Android fone हुआ करता था और जिसे हम अपने हाथों में बड़ी अदा से flaunt किया करते थे. और करते भी क्यों न...! वो अपने समय का सबसे smart फोन हुआ करता था… पर.. जल्दी ही I Phone के आने से हमारी जिंदगी बदल जाने वाली थी इसका हमें पता ही नहीं था. I फ़ोन का बुखार हमारी बीबी पर किस कदर चढ़ चुका है ये हमें उस दिन पता चला, जब एक दिन सुबह हमारी श्रीमतीजी ने हमें बड़े प्यार से पुकारा, " ऐ जी...सुनिये ना...!" उनके इस प्यार भरे बोल ने हमारे दिल की धड़कन बढ़ा दी; हमें लगा कि क़यामत हमारे करीब ही है. उन्होंने जब भी हमें प्यार से पुकारा, हमारी जेब पर गाज गिरी है. उन्होंने हमारा हाथ पकड़ कर हमें सोफे पर बिठाया और हम भी मंत्रमुग्ध से उनके हो लिए और जाकर सोफे पर बैठ गए. जनाब...! आप भी समझ सकते हैं कि बीबी की पकड़ से बड़े-बड़े महापुरुष नहीं बच पाए फिर हम तो अदना से इन्सान थे.

उन्होंने माथे पर पड़ी हमारी जुल्फ प्यार से पीछे किया तो हमारा कलेजा मुँह को आ गया. " आप कितना काम करते हैं और थक जाते हैं..., देखिये न...! आपका चेहरा कितना दुबला हो गया है...", ये सुनकर हम अपने चेहरे पर हाथ फेरने लगे.
 " अरे...! आप ऐसा करें थोड़ा रिलेक्स करने के लिए कुछ लाइट म्यूजिक या गाने सुन लिया करें या फिर कोई funny video ही देख लिया करें..." अपनी श्रीमतीजी के मुखारविन्द से अपने लिए चिन्ता देखकर हमारा दिल बल्लियों उछलने लगा, पर अन्दर ही अन्दर हमारा दिल अब शंकित हो चला था कि आज सूरज आखिर पश्चिम से कैसे निकला है...? " आप ऐसा क्यों नहीं करते...?" उनके इस दिलफरेब सवाल से लगा मानों हमारे दिल की धड़कन ही रुक जाएगी.
 " आप एक नया mobile ले लें...जिसमें आप अपनी पसंद के गाने भरवा के सुनना.." उनकी ये चाहत सुनकर हम चकरा गए. आज हम जान पायें कि वे हमें कितना चाहतीं हैं और हमारी कितनी चिंता करती हैं. इस ख़ुशी में डूब-उतर रहा  हमारा दिल " आह और वाह " दोनों कर उठा. उनके बरसने वाले प्यार का राज हम जान पाए. यानी हमारी जेब पर डाका ऐसे नहीं तो वैसे पड़ ही चुका था. वे तो मानो आज हमें तन्हा छोड़ना ही नहीं चाहती थीं.
 " रूपल (हमारा बेटा)... बता रहा था कि आजकल एप्पल का I फ़ोन होना चाहिए...", ये सुनकर हमारी धड़कन ने तो मानों धड़कना ही बंद कर दिया, हमारा दिल हमारे हलक में आकर अटक गया. ये तो सरासर दिन दहाड़े डाका पड़ने वाली बात हो गई थी. पर अब ऐसा तो हो नहीं सकता था कि हम श्रीमतीजी को ignore कर देते, हमारी शामत तो आई नहीं थी जो हम ऐसा करते. अब दिल पर पत्थर रखकर हमने अपनी सेविंग्स में से बहुत सारे हजार रुपयों को निकलने की सोची.
 हमारी पत्नीजी हमसे बड़े प्यार से पूछ रहीं थीं कि हम पुराने पड़ चुके मोबाइल का क्या करेंगे...?" ऐसा करो डार्लिंग...!", हमने उनकी ओर प्रश्न सूचक निगाहों से देखा- " रूपल बता रहा था कि पुराना फोन ऑनलाइन बड़े अच्छे दाम पर बिक जाता है.. अरे वो मुई भूल गई...! बड़ी अच्छी सी साईट का नाम ले रहा था...कोई ओले नाम की साईट ...", वे थोड़ा सोचते हुए बोलीं. हम समझ गए वे !!! साईट की बात कर रहीं थीं. अब जब सिर ओखली में गया है तो मूसल से क्या डरना, सोचकर !!! पर अपने एक साला अदद से smart मोबाइल को बेचने के लिए उसकी खूबियों सहित डाल दिया


  शाम होते न होते हमारे मोबाइल पर एक अन्जाना सा नंबर चमका. उधर से एक बड़ी ही संगीतमयी हेलो सुनाई दी. हमारे दिल की वीणा के तार झनझना उठे. " आप पवनजी बोल रहे हैं...? " वे मोहतरमा हमसे पूछ रहीं थीं. 'पवनजी' शब्द से हमारी जो उन्होंने इज्जत आफजाई की थी उससे तो लग रहा था कि वे बोलतीं रहें और हम सुनते रहें. हम थोड़ा सम्हले. " जी...मै पवन बोल रहा हूँ...! आप कौन मोहतरमा बोल रहीं हैं...?"
" जी बात ये है कि आपने !!!.com पर अपने फोने को बेचने के लिए ad दिया है... मै उनके ही बारे में बात करना चाह रही थी. बाय द वे मेरा नाम संगीता है..." उसके बाद उन्होंने क्या कहा हम उनकी आवाज के तर्रनुम में इतना खो चुके थे कि भूल ही चुके थे कि वे हमसे किस बारे में बात कर रहीं हैं.
 " अच्छा तो बताइए कि आप अपना मोबाइल कितने में बेचेंगे...?" वे पूछ रहीं थीं.
 हमने अचकचाकर बोल उठे, " जी आज जरा बिजी हूँ... आपको कल बताता हूँ." 

 " जी... ठीक है..." कहकर उन्होंने फोन काट दिया और हम उनकी आवाज में डूबते-उतरते ही रहते अगर हमारी श्रीमतीजी की कर्कश आवाज ने हमें वर्तमान में लाकर खड़ा न कर दिया होता. हमने सावधानी से संगीता का नाम एस नाम से save कर लिया और दिल ही दिल में ये ठान लिया कि हम अपना फोन अपनी 'एस' को ही बेचेंगे. पत्नी ने हमसे पूछा कि किसका फोन था तो हमने दोस्त का बताकर टाल दिया. अगले दो दिनों में बहुत सारे कॉल फोन को खरीदने के लिए आये पर नहीं आया तो वो कॉल जिसका हमें नींद में भी इन्तजार रहता था, अब तो हमारी बेकरारी बढ़ने लगी और हम से रहा नहीं गया और सुबह उठकर जैसे-तैसे तैयार होकर ऑफिस के लिए घर से बाहर निकले तो कार में बैठते ही सबसे पहले हमने 'एस' को फोन लगाया और जब रिंग जाने लगी तो हमारे दिल की धड़कन भी वैसे-वैसे तेज  होने लगी. आख़िरकार कुछ सेकंड जो की हमें सदियों से लग रहे थे, के बाद उन्होंने फोन उठाया उनकी हेलो ने हमें ऊपर से नीचे तक हिला दिया. हमने उन्हें बताया कि हम फोन बेचने के लिये तैयार हैं. पर... इसके लिए उन्हें पहले हमसे मिलना पड़ेगा. उनके क्यों के सवाल पर हमें उन्हें समझाना पड़ा कि वे फोन एक बार तो देखना चाहेंगी जिससे उन्हें खरीदने में आसानी होगी. वे इस बात से सहमत थीं. हमने उन्हें दूसरे दिन शहर के नामी-गिरामी रेस्टोरेंट में मिलने का समय दिया और ऑफिस से घर लौटते समय अपनी श्रीमतीजी के पसंद के रसगुल्ले ले जाना न भूले. और कोई दिन होता तो शायद हम उनके बार-बार कहने पर भी उनकी फरमाइश भूल जाया करते थे. पर...आज जब हम लेकर गए तो उन्होंने हमें बड़ी ही ताड़ने वाली नजरों से घूरा और हम उनकी नजरों से बचते हुए ये कहकर बाथरूम में घुस गए कि फ्रेश होकर आते हैं. असल में हम कल उनसे मिलने की ख़ुशी को अपनी श्रीमतीजी की नजरों से बचाकर रखना चाहते थे, इसी कारण से हम बाथरूम की शरण में थे और 'एस' से मिलने के ख्यालों में अभी डूब-उतर ही रहे थे कि बाथरूम के दरवाजे पर जोर-जोर की थाप पड़ने लगी. 

   दरवाजे के दूसरी तरह से श्रीमतीजी दे दहाड़ने की आवाज सुनाई दी, " जरा...जल्दी से बाहर निकलो..!" हमारा दिल हलक में आ गया और डरावने से ख्याल दिल में आने लगे कि अचानक 5 मिनिट में ऐसा क्या हो गया...? एक अनजानी सी आशंका से हमने फट से बाथरूम का दरवाजा खोला. और दरवाजे का खुलना हुआ कि मानों बम फटा, " कौन है ये 'एस'...?", श्रीमतीजी के इस सवाल से हमें जनवरी के महीने में भी पसीना आ गया. हम सम्हलते इससे पहले ही उनका दूसरा सवाल हमारी तरफ बम के गोले की तरह आया-" कौन है ये चुड़ैल...? कब से चल रहा है ये चक्कर...? तभी तो मै कहूँ आज सूरज पश्चिम से कैसे निकला...? जो तुम मेरे लिए रसगुल्ले ले कर आये हो...?", हमारी तो सांप छछूंदर वाली हो चुकी थी. अब हम कैसे उन्हें 'एस' वाली बात बता सकते थे. हम उन्हें लाख सफाई देते पर वे हमारी बात पर विश्वास नहीं करने वालीं थीं, ये बात हम जानते थे. हम उस घड़ी को कोस रहे थे जब हमने 'एस' का नंबर अपने मोबाइल में save किया था.
 अब कहने को कुछ भी नहीं बचा था और उसके बाद घर में जो महाभारत हुई उसके नतीजे में हमारी श्रीमतीजी पिछले 4 महीनों से मायके में जाकर बैठीं हैं.


 घर में अपने माता-पिता से जो रोज हमें लानत मिलती है वो हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते. हमारा एकलौता बेटा हमें अपना प्रतिद्वंदी समझने लगा है. एक दिन हमने उसे बड़बड़ाते हुए सुन लिया, " बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम... हमारे दिन हैं girlfirend बनाने के और इन्हें इश्क सूझ रहा है...!!" अब आप ही बताएं हमारे दिल पर क्या गुजर रही है. केवल इतना ही कह सकते हैं, " बात इतनी सी थी पर... दूर तक चली गई..." खैर...! हमारी सलाह माने तो कोई भी सेकंड hand मोबाइल या laptop बेचने की सोचें तो हमारे जैसी गलती भूल से भी भूल कर न करें.  जय....जय.....    (वीणा सेठी)
(all images from google.com)



https://www.cashify.in/

बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

चार लाइन

एक्सपायरी डेट 

दवाई की एक्सपायरी डेट होती है;
पता होती है...
इंसान की एक्सपायरी डेट होती है.
पर...लापता होती है.

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

लघु कथा---10



माँ का दिल



नये साल की वह पहली सुबह जैसे बर्फ की चादर ओढ़े ही उठी थी. 10 बज चुके थे पर सूर्यदेव अब तक धुंध की रजाई ताने सो रहे थे. अनु ने पूजा की थाली तैयार की और ननद के कमरे में झांक कर कहा," नेहा! प्लीज नोनू सो रहा है ,उसका ध्यान रखना. मैं मंदिर जा कर आती हूँ ।"
शीत लहर के तमाचे खाते और ठिठुरते हुए उसने मंदिर वाले पथ पर पग धरे ही थे कि उसके पैरों को जैसे किसी ने जकड़ लिया. एक खौफनाक मंजर उसके मुँह बाएं खड़ा था. सामने की सड़क  पर 4-5 साल का बच्चा खून से लथपथ पड़ा था. सुबह की इस ठिठुरा देने वाली ठण्ड में सड़क विधवा की सूनी मांग की तरह खाली पड़ी थी. उसने मंदिर की ओर ये सोच के कदम बढ़ाये कि वह इस पचड़े में नहीं पड़े किन्तु उस बच्चे के करीब से निकलते हुए उसके मन में हूक सी उठी. “ न जाने किस माँ का लाल है...? कहाँ होगी वह...? क्या उसे अपने लाड़ले का ख्याल नहीं आया होगा...?” जैसे सवाल उसके मन में उठ रहे थे. वह जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ी तो उसके पैरों को जैसे किसी ने जकड़ लिया, उसके मन में एकदम अपने बेटे नानू का ख्याल हो आया और उसने पलट कर उस बच्चे को देखा तो उससे रहा नहीं गया और वह दौड़कर उस बच्चे के पास जाकर बैठ गई, उसके हाथ में पूजा की थाली थी जिसे उसने वहीँ ज़मीन पर रख दिया और धीरे से बच्चे पर झुकी तो उसने पाया कि बच्चे की सांस चल रही थी. उसने तुरंत ही निर्णय लिया और उस बच्चे को गोद में उठाकर दौड़ लगाईं. उसे पता था कि 3 ब्लाक छोड़कर डॉ. सोनी रहते हैं, उनके घर पहुँचकर उसने तबातोड़ घंटी बजाई. डॉ. सोनी आज थोड़ा देर से सोकर उठे थे पर घंटी की आवाज से समझ नहीं पाए कि कौन हो सकता है...? दरवाजे पर वे अनु तो देखकर थोड़ा अचरज में पड़ गए. उसकी गोद में घायल  बच्चे को देखकर वो तुरंत सारा मांजरा समझ गए और जल्दी से अन्दर से कार की चाबी लेकर आये और कार सिटी हॉस्पिटल की ओर दौड़ा दी. बच्चे को ओ.टी. में ले जाकर उसका तुरंत ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया, और इसी दौरान पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया. इतना सब होतो-होते 12 बज चुके थे. बच्चे को सुरक्षित हाथों में जान अनु ने चैन की सांस ली और अब उसे घर की याद सताने लगी. डॉ. सोनी ने उसे घर भेज दिया और उसका मोबाइल नं. ले लिया ताकि उसे बच्चे का हाल-चाल बता सकें. 2-3 बजे के करीब अनु को डॉ. का फोन आया और उन्होंने बताया कि उस बच्चे की माँ मिल गई है. जोकि अपने बच्चे के साथ बस से अगले शहर में अपने मायके जा रही थी, रास्ते में कब उसकी नींद लग गई उसे पता ही नहीं चल और वो बच्चा खिड़की खुली होने के कारण उससे बाहर झांक रहा था और इसी दौरान वह उस खिड़की से बाहर अधिक झुक गया था और सड़क पर गिर गया था जिससे उसे काफी चोटें आईं थीं पर वह अब खतरे के बाहर था. कहना नहीं होगा कि वह महिला और अनु स्नेह बंधन के ऐसे सेतु से जुड़ गए थे जो कभी भी टूटने वाला नहीं था, ये एक माँ से माँ का रिश्ता था.

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