शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

भूली बिसरी यादें

कुछ बाकि है … 

बातें तो बहुत सारी होती हैं कहने को पर कुछ बातें ऐसी होती हैं जो जेहन से नहीं निकलती, ऐसे ही एक बात है जो मैं सबसे शेयर करना चाहती हूँ.
मेरे जीवन में भी एक समय ऐसा आया  था जब लगा था मानो जिन्दगी ठहर गई हो और मैं एक ऐसी अँधेरी गुफा में फंस गई हूँ, जहाँ से निकलना लगभग असंभव सा लग रहा था। 
मै जब बहुत संघर्ष में घिरी थी और हर ओर से निराशा का सामना करना पड़ रहा था  जिन्दगी का कुछ भी मतलब नहीं रहा था. और जीवन की इन्ही झंझावातों में घिरी अपने ही विचारों में तल्लीन मई शाम के समय बगीचे की बेंच पर बैठी हुई थी …मेरे बाजू  में एक बुजुर्ग कब आकर बैठ गए मुझे  चला। " बड़ी गहरी सोच में डूबी  हो बेटी…?"
मैंने अचकचाकर अपना सिर उठाया और उनकी तरफ देखा पर  जवाब में कुछ भी कहते नहीं बना।  

" काफी दिनों से देख रहा हूँ।  यहाँ आकर चुपचाप बेंच पर बैठ जाती हो … मेरे ऐसे पूछने का बुरा तो नहीं लगा  … ?"

" नहीं अंकल! ऐसी कोई  बात नहीं  … " मुझसे कुछ कहते नहीं बना। 

उन्होंने कहा ," एक बात बोलू बेटा ! … बुरा तो नहीं मानोगी  …?"

मैंने न में सिर  हिलाया। तो वे बोले ," लगता है काफी परेशान हो  ....?"  मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ कि इन्हे कैसे पता चला जबकि ये तो मुझे जानते तक नहीं।  शायद वे मेरी प्रतिक्रिया को भांप गये थे और फिर जो बात उन्होंने मुझे कही उसने मेरी जिंदगी के प्रति सोच में क्रन्तिकारी परिवर्तन ला दिया। 




उन्होंने  मुझसे कहा ," बेटा ! याद रखना ,समय नहीं गुजरता पर लोग गुजर जाते हैं. सो स्वयम को गुजरने मत दो ओर अपने जीवन को एक मतलब दो, संघर्ष जीवन का हिस्सा है, ये समय भी गुजर जायेगा, हिम्मत मत हारो."
 और इस बात से  मेरी जिंदगी में जो सकारात्मक परिवर्तन आया, कहना नहीं होगा कि उसने मेरी जिंदगी को किस कदर बदला आज मई एक फैशन डिजानर और लेखक हूँ. 
याद रखें जिंदगी में हार मानकर बैठना नहीं है बल्कि संघर्ष कर ऊपर उठाना है। 

4 टिप्‍पणियां:

  1. "ये समय भी गुजर जायेगा...."
    एक दम सहमत

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  2. हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल रविवार (12-04-2015) को "झिलमिल करतीं सूर्य रश्मियाँ.." {चर्चा - 1945} पर भी होगी!
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सुन्दर विचार लधुकथा के रूप में मन को छू गए |

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  4. आगे बढ़ते रहना ही जीवन है...बहुत सारगर्भित प्रस्तुति..

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