गुरुवार, 28 अगस्त 2014

हाइकु:गणेश उत्सव


 हाइकु:गणेश उत्सव  
 गणेश स्तुति




हे विघ्नहर्ता!
धरती पर आओ;
संकट हरो.


हे गजानन!
हो शुभारंभकर्ता
हर कार्य के.


लम्बोदराय
मूषक है वाहन
ऐसे गणेश.


.विद्या के दाता;
रिद्धि-सिद्धि वर दे;
गौरी सुताय.
                                                                                   वीणा सेठी

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (29.08.2014) को "सामाजिक परिवर्तन" (चर्चा अंक-1720)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. समरथ सुमति सो सुकृती, लभ्य लाभ जो लाहि ।
    कृपन कर ब्यय करत तिन बरतत जगहित माहि ।१७९२।

    भावार्थ : -- वह वाणिज्यिक वास्तविक है, सामर्थ्यवान है, बुद्धिमान है, पुण्यात्मा है, जो उचित लाभ ही अर्जित करता हो । और उस लाभ को कृपणता पूर्वक व्यय करते हुवे जग के हित में बरतता हो ॥

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