सोमवार, 16 अप्रैल 2012

यादें.4...............(बात बाकि है.)

जागते रहो.....................



दिसम्बर की ठिठुरा देने वाली रात में ख़ामोशी को चीरती एक आवाज ने गहरी नींद से जगा दियारात में गश्त लगाने वाले चौकीदार की आवाज " जागते रहो..........." ने वाकई जगा दिया थासारी रात इन्ही दो शब्दों पर केन्द्रित हो कर रह गई थी पिछले २०० सालों से कोई कोई चौकीदार इसी तरह से आवाज लगा कर जगाने की कोशिश कर रहा है और हमरी नींद है की टूटने का नाम नहीं ले रहीक्या वाकई हम जग चुके हैं.


2 टिप्‍पणियां:

  1. इसका तो कोई जवाब ही नहीं कुछ बातों के लिए हाँ कुछ के लिए ना कुछ बातें है की सोने नहीं देती तो कुछ बातों में हमने कुंभकरण को भी पछाड़ रखा है ....

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  2. उस आवाज को आदत में ढाल लिया हैं

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