सोमवार, 16 अप्रैल 2012

लघु कथा -एक बात ..............1

जागते रहो...

दिसम्बर की ठिठुरा देने वाली रात में ख़ामोशी को चीरती एक आवाज ने गहरी नींद से जगा दियारात में गश्त लगाने वाले चौकीदार की आवाज " जागते रहो..........." ने वाकई जगा दिया थासारी रात इन्ही दो शब्दों पर केन्द्रित हो कर रह गई थी पिछले २०० सालों से कोई कोई चौकीदार इसी तरह से आवाज लगा कर जगाने की कोशिश कर रहा है और हमारी नींद है की टूटने का नाम नहीं ले रही। क्या वाकई हम जग चुके हैं...?
उस ठिठुरती रात के अँधेरे में उस चौकीदार की आवाज फिर से सन्नाटे को चीरती हुई फिजा में गूंजने लगी ,'जागते रहो....."



5 टिप्‍पणियां:

  1. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।



    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

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  2. हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!

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