मंगलवार, 2 जुलाई 2013

मेरी शब्द यात्रा ----3

वाक् -युद्ध
वाक् युद्ध याने शब्दों की लड़ाईबिना शस्त्र या अस्त्र के लड़ा जाने वाला ऐसा युद्ध जिसमें कोई भी ख़ून खराबा नहीं होता और जिसमें किसी भी तरह के युद्ध क्षेत्र की आवश्यकता नहीं होतीइस वाक् युद्ध में कोई भी आपका शत्रु या मित्र आपके सामने हो सकता है
 वाक् युद्ध में किसी भी तरह के बचाव के लिए ढाल की जरुरत नहीं होतीशब्दों द्वारा लड़ी जाने वाली इस लड़ाई में जब स्वर की प्रत्यंचा पर शब्द रूपी बाण से किसी पर वार किया जाता है तो वह ख़ाली नहीं जातावैसे भी कहा जाता है की शब्द का वार कभी ख़ाली नहीं जाता- और यह शब्द की तीव्रता पर निभर्र करता है की वह कितना गहरा घाव करता हैशव्द रूपी बाण शरीर पर घाव नहीं करता और ही यह घाव मानव काया पर दिखाई देता हैयह सीधे ह्रदय पर घाव करता है और जब इन्सान की आत्मा घायल होती है तो केवल आह निकलती हैयदि घायल इन्सान पलटवार करता है तो उससे केवल निराशा और मायूसी ही हाथ लगती है। शब्दों की इस जंग में केवल इतना ही होता कि इन्सान आपसी रिश्तों को हमेशा के लिए खो देता है. और फिर कितना भी कोशिश कर ले उसे पा नहीं सकता। 

वक् युद्ध से दिल को जो चोट लगती है उसका मरहम केवल और केवल शब्द ही होते हैंसांत्वना भरे शब्द इन्सान के दुखः को थोडा कम कर सकते हैं पर उसके निशान वक्त गुजर जाने के बाद भी कम हो जाते हैं पर रहते जरुर हैं। 
 
इसीलिए कहा जाता है कि जब भी जुबान खोलो सोच समझकर खोलोदांतों के बीच में लचीली जुबान इसीलिए कैद है क्योंकि वह जब भी लपक कर बाहर आएगी अपना असर छोड़ जाएगी.


"तुम जान ले लेते, कोई गम न  होता,
पर  तुमने जान ली मेरी, अपने लफ्ज़ों के वार से।" (वीणा )



 






2 टिप्‍पणियां:

  1. लोगों का दिल जीतना हो तो...मीठा मीठा बोलो...
    सच!!!

    सुन्दर पोस्ट
    अनु

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  2. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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