रविवार, 18 अप्रैल 2010

.लघु कथा-3......(बचपन-२)

सोनू...

भोपाल के बस स्टैंड पर खड़ी बसों में वह बच्चा पानी के पाउच बेच रहा था। भारत के लाखों बच्चों में से वह भी एक बच्चा था जो जिंदगी की लड़ाई बहुत छोटी उम्र से ही शुरू कर देते हैं। उसका नाम 'सोनू' है।
मै बस में बैठी हुई बस जाने के इंतजार में पत्रिका पढ़ रही थी। एक कोमल और धीमी आवाज ने मेरा ध्यान खिंचा , ' आंटी! ........बहुत गर्मी पानी लीजिये, ठंडा पानी है'। मैंने सर उठाकर देखा सामने ७-८ साल का बच्चा पानी का पाउच हाथ में पकड़े खड़ा था। यद्धपि मेरे पास पानी की बोतल थी, पर उस बच्चे में कुछ बात थी जिसने मुझे उससे पानी लेने के लिए विवश किया। मैंने पाउच लेकर पूछा, ' कितने पैसे बेटा............. ?', उसने मुस्कराकर कहा, अरे .आंटी ! पैसे नहीं रुपये........। उसकी बात ने मेरे चहरे पर हसीं की लकीर खींच दी।
अरे...............! हाँ सॉरी कितने रुपये.....? मेरे इस सवाल पर बोला 'दो रुपये'।
अब तक मेरे अंदर एक उत्सुकता जाग चुकी थी और मै उसके विषय में जानने के लिए उससे उसका नाम पूछा और उसने अपना नाम सोनू बताया। जब मैंने उससे ये जानना चाहा की वो पानी का पाउच बेचने का काम क्यों कर रहा है? तो वह बिना कुछ बोले ही बस से उतर गया। और मुझे प्रश्नों  के भंवर में छोड़ गया। मेरी और सोनू की बातें एक आइसक्रीम बेचने वाला सुन रहा था, उसने मुझे बताया कि सोनू का पिता इसी बस स्टैंड पर फल ला ठेला लगाया करता था, पिछले साल एक बस दुर्घटना में उसके पिता कि स्टैंड पर ही मृत्यु हो गई थी।
घर में माँ और दो बहने हैं। बहनें स्कूल में पढ़ती हैं और माँ काम पर जाती है। सोनू इसी साल स्कूल बंद होने के कारण पानी बेचने का काम कर रहा था। वह दिन भर में १०० से २०० रुपये कमा  लेता है.उसकी उम्र लगभग
१०-११ साल कि है। उस बच्चे के चहरे पर एक आत्मविश्वास था पर उसका बचपन जिदगी कि आप-धापी में कहीं धीरे-धीरे ओझल होता जा रहा था। हमारी सरकार ने बेशक बच्चों द्वारा काम कराये जाने को निषेद्ध कर दिया हो पर वो ' सोनू' जैसे बच्चों के परिवार के विषय में काया ठोस काम कर रही है या क्या करेगी इस विषय में हम कभी भी कुछ भी नहीं जान पाएंगे।
क्या आपके आसपास भी ' कोई सोनू है ?'


6 टिप्‍पणियां:

  1. har gali har nukkad pe sonu jaisa koi na koi hai...main chahta hun aap ye kavita jarur padhe...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/2010/04/blog-post_4768.html

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  2. Is desh me ye sawal hi galat hai ki hume yaha kahi na kahi koi sonu mila ki nahi,kiyun ki is desh ki har gali me ek sonu se inspired kahani jarur millegi.jis tarha se hum koshish kar rahe hai ki mujhe nahi lagta ki kuch ho bhi sakta hai.

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  3. bachpan jab garibi me panapta hai to uski yahi kahani hoti hai.

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