शहर के चोराहे के पास कचरे का ढ़ेर पड़ा था। उसी ढ़ेर पर बसी खाने का सामान भी बिखरा था, ३-४ गरीब बच्चे और बूढ़े खाने के सामान पर अपना हाथ साफ कर रहे थे , बासी खाने में से अपने खाने लायक खाना ढूंढते हुए एक बच्चा ख़ुशी से चिल्लाया, वाह ! मुझको तो बर्फी मिली और उसके हाथ में बर्फी का टुकड़ा था। उसे देख दूसरे बच्चे भी इसी उम्मीद में कचरे के ढ़ेर में पड़े बासी खाने को तेजी से खंगालने लगे। तभी पुलिस की सिटी की आवाज से सभी भिखारी घबरा गए और वहाँ से भाग छूटे. वो सड़क एक भीड़ भरी जगह थी और वाहने की आवाजाही की भरमार थी। ऐसे में बाकि सबने तो दौड़ कर सड़क पर कर ली पर एक छोटा गरीब बच्चा उनसे पीछे रह गया और सड़क पर करने की चेष्टा में एक बस की चपेट में आ गया। चारो और अफरा-तफरी मच गई बच्चे ने बस की नीचे दम तोड़ दिया था किन्तु उसके उस हाथ में अभी भी जीवन के चिन्ह थे जिसमे रोटी का टुकड़ा था और धीरे से वो हाथ भी अब कापकर शांत हो चुका था। थोड़ी देर बाद उस चोराहे पर वैसे ही वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी और लग ही नहीं रहा था की अभी कुछ पल पहले यहाँ किसी बचपन ने दम तोडा था.
बात एक अनकही सी- उन बातों का एक सिलसिला है जो जाने अनजाने हमारे जीवन में रोजाना घटती रहती हैं और हम उनपर ध्यान देते भीहैं और उनकी अनदेखी भी कर देते हैं पर कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जो मन और दिमाग में बसेरा कर लेती हैं .ऐसी ही कुछ बातें और घटनाएँ बाटने की इच्छा है...............
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रविवार, 21 मार्च 2010
सोमवार, 8 मार्च 2010
कहानी .........नारी -4
महिला दिवस पर..... एक बात अनकही सी
मेरा नाम क्या है---?
कुछ समय पहले मै अपनी परचित के गृह नगर गई थी किसी विवाह में शामिल होने जो की एक छोटा सा शहर है. मेरा नाम क्या है---?
विवाह के लिए खरीदारी के लिए वे भी मुझे बाजार ले गए, बाजार में जब सामान खरीद रहे थे तो दूर से कानों में स्पीकर का शोर सुनाई दिया, धीरे-धीरे शोर पास आता गया। पहले तो स्पीकर पर क्या बोला जा रहा है उस पर ध्यान ही नहीं दिया, छोटे शहरों में अक्सर पिक्चर का प्रसारण लाउड- स्पीकर पर होता है। पिक्चर के प्रसारण में गाने अवश्य बजाये जाते हैं अतः पहले तो यही लगा, पर जब गाने की आवाज नहीं सुनाई दी तो थोड़ा पास आने पर स्पीकर पर बोलने वाले के केवल शब्द ही सुनाई दे रहे थे। स्पीकर वाला जब और पास आया तो उसके बोले शब्दों पर कान लगाया तो पता चला की वह किसी की मृत्यु की सूचना दे रहा था। किसी महिला की मृत्यु की सूचना थी -जो इस प्रकार थी--" अमन और सोनू की दादी................. और महेश श्रीवास्तव की माताजी............, दिनेश व रुपेश की चाची............ तथा स्वर्गीय बाबूलाल श्रीवास्तव की पत्नि................ का निधन हो गया है, जिनकी अन्तिमयात्रा उनके निवास स्थान कमल भवन, अनूप नगर कालोनी से शाम ४ बजे निकली जाएगी.........."।
इस पूरे प्रसारण में दिवंगत महिला का कही भी नाम नहीं था।
आज जब हम विश्व महिला दिवस मना रहे हैं तो ये भी एक सच जो आज का जिन्दा सच है इस के विषय में भी जान लें........................
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