जीवन
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जीवन
तुम हो
एक अबूझ पहेली,
न जाने फिर भी
क्यों लगता है
तुम्हे बूझ ही लूंगी.
पर जितना तुम्हे
हल करने की
कोशिश करती हूँ,
उतना ही तुम
उलझा देते हो.
थका देते हो.
पर मैंने भी ठाना है;
जितना तुम उलझाओगे ,
उतना तुम्हे
हल करने में;
मुझे आनद आएगा.
और
इसी तरह देखना;
एक दिन
तुम मेरे
हो जाओगे.
(वीणा सेठी)

