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गुरुवार, 20 अगस्त 2015

Get a Home of Your Dream




  ये मेरा घर ...


गुलजार जी की लिखी और जगजीत सिंग जी द्वारा गई एक ग़ज़ल जब भी सुनी जाये; कानों में जैसे मिश्री सी घोल देती है. और लगता है कि बस सुनते रहो...!!. ‘ ये तेरा घर ये मेरा घर; किसी को देखना हो गर, तो पहले आके मांगे तेरी नजर- मेरी नजर...
 
"घर" है तो छोटा सा शब्द, पर यही वो जगह है जहाँ तमाम दुख और परेशानियों से  राहत मिलती है, शांति-सुकून मिलता है, इसलिए घर ऐसा हो जहाँ इन्सान फुर्सत के कुछ पल ख़ुशी से बिता सकें (वीणा (.

घर वो जगह है; जहाँ इंसान पूरी दुनिया से अलग अपने आप के साथ रहना पसंद करता है. आप स्वयं ही कल्पना करें कि पूरी दुनिया एक खुले आँगन की तरह है और आप एक ऐसा कोना तलाश रहें हैं, जहाँ आप दूसरों की नजरों से दूर रहकर अपने साथ और अपने अपनों के साथ कुछ पल अपनेपन के गुजरना चाहतें हैं. तब ऐसा नहीं लगता ...?? कि घर से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती.

एक बात जान लीजिये ‘मकान’ घर नहीं हो सकता. “A ‘House’ can never ever be a ‘Home’. A House is only a Concrete Structure containing 4 walls, a roof and some windows and door. But a ‘Home’ is the emotional structure that is built by some people, who live in it.”(Veena)

मकान तो बन सकता है पर घर नहीं बनाया जा सकता, जब तक की उसमें आकर रहा न जाये; बसा न जाये. घर में रहने के लिए कुछ साजो-सामान की भी जरुरत पड़ती हैं अब ये सामान कुछ ऐसा होना चाहिए कि जिससे घर में रहने वाले लोगों के दिलों में एक- दूसरे के लिए कुछ खास बात पैदा कर सके...! जिससे लगे की ये घर इसमें रहने वालों के दिल के करीब है.

# आप सहमत नहीं हैं क्या मेरी इस बात से...? कोई बात नहीं ...! हो जायेंगे. हाँ तो ...! मै बात कर रही थी, घर के साजो-सामान की, घर की साज सज्जा की, कि जिससे लगे कि ये घर नहीं बल्कि किसी की शख्सियत का आइना है.
 
अगर मैं अपनी बात करूँ! ...तो मेरी पसंद का घर कैसा होगा...? ये थोड़ा सोचना पड़ेगा. हूँ ...! मैं बता सकती हूँ कि मेरी पसंद का घर कैसा हो सकता है.

अगर मैं आसमान, समुद्र और हरियाली को एक साथ अपने घर में उतार लूं ...तो कैसा रहेगा...? आप को क्या लगता है...? 

घर के बाहर हरियाली का साथ तो हमेशा से ही अच्छा रहता है. पर... मैं इसमें भी कुछ innovative और creative चाहती हूँ. पर ... सोचने के बात ये है कि वो अलग हटकर क्या हो सकता है...? क्यों न plastic की बोतल को recycle किया जाये. दीवारों कोई पैटर्न बनाकर उनके टांगने के लिए कुछ एंकर लगायें जाएँ. कुछ पुराने टायर को काटकर भी थोड़े क्रिएटिव से गमले प्लांट लगाने के लिए बनाये जा सकते हैं. हैं ना...! environmental friendly idea.


bed room

अब अगर बेड रूम याने शयन कक्ष की बात करें...! तो इतना जान लीजिये कि मुझे तो समुद्र का aqua blue और आसमान का हल्का नीलापन भायेगा. सोचिये...! अगर आसमान और समुद्र दोनों आपके सोने के कमरे में उतर जाएँ तो कैसा लगेगा...? नीला रंग आध्यात्म का भी तो है. इस कमरे में queen sized bed और वो भी white painted हो तो क्या कहने...! और उस पर रॉयल ब्लू ...!नहीं नेवी ब्लू बेडिंग सेट सोने पर सुहागा है. आप क्या कहते हैं...?


living room


लीविंग रूम तो बिलकुल बगुले सा सफेद हो तो क्या कहने...? और उसके कंट्रास्ट करता smoky grey furniture- बिलकुल बादलों जैसा होगा. अब अगर मानसून के बादलों के अलग-अलग लाइट और डार्क शेड्स यहाँ पर अटखेलियाँ करते नजर आयें...तो कैसा रहेगा...? आप एक बार कल्पना तो करके देखें.

लगता है कुछ छूट रहा है, पर... किसी भी घर का सपना हरेक का अलग-अलग होता है. और इस कल्पना के संसार में किसी अपने सिवाय किसी दूसरे की बादशाहत नहीं होती. नो एंट्री का बोर्ड लगा रहता है.

चलिए घर के खास हिस्सों की बात तो हो चुकी और मुझे लगता है कि अभी भी और कुछ कहने को बाकि है, पर वो फिर कभी सही...! इतना जान लीजिये कि घर केवल सामान से नहीं प्यार और अपनेपन से बनता है. घर को संवार कर रखना एक कला है. जितनी शिद्दत से आप से संवारेंगे आपका घर उतना ही सुन्दर लगेगा. आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी हमेशा डेरा डाले रहेगी. साफ़ और शफ्फाक घर आपके स्वाभाव और रूचि को ही रेल्फेक्ट करेगा.
ये घर नहीं मेरे दिल का आइना है;
   एक बार इसमें बस कर तो देख.
   यहाँ तुझे सुकून और ख़ुशी मिलेगी;
   एक बार इसमें समा कर तो देख.(वीणा सेठी)




“I am participating in the  Upload and Transform #HomeCanvas activity in association with Godrej Interio and BlogAdda.










सोमवार, 4 मई 2015

बात एक अनकही सी-प्यारा सा घर हमारा


प्यारा सा-एक घर हमारा

आइये मकान को घर बनायें-------

 "घरऔर "मकाशब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' रहने की जगह'. और दोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है. 'मकान' ईंट, रेत, सीमेंट से ढाला गया एक आकर होता है और 'घर' उसमें बसेरा करने वाले इंसानों से बनता है. दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएँ, कहीं भी रह आयें इन्सान  की पनाहगाह घर  ही होती है. 'मकान' तभी 'घर' होता है जब उसमें रहने वाले उसे सही मायनों में घर बनाना चाहते हों. कोई भी घर ' तेरा-मेरा घर' होने पर घर  नहीं बल्कि मकान बन जाता है. घर जब ' हमारा घर' बनता है तभी 'घर' सार्थक होता है. 

मकान नहीं घर



                                          

'
हमारा घर ' हर आदमी का सपना होता है. पर उसे वह तभी पूरा कर सकता है, जब वह उसे अपनेपन से सराबोर कर दे. ये 'घर' परिवार के किसी एक सदस्य से भी नहीं बन सकता, बल्कि सबकी मिली-जुली कोशिशों एवं सहयोग से ही संभव है. आज के दौर में जिंदगी की इस आपाधापी में रिश्ते, जो कोमल पौधे की तरह होते हैं, को संभालकर और सहेज कर रखना और भी कठिन होता जा रहा है.एक घर को 'तेरा-मेरा' की जगह ' हमारा ' बनाना वास्तव में कठिन हो सकता है, असंभव नहीं. केवल कुछ एक बातों को फिर से याद करने की, उन्हें समझाने की जरुरत है. ये बातें हमें मालूम हैं, इन्हें सिखाने व समझाने की भी जरुरत नहीं.
 गिले- शिकवे का दौर खत्म हो:-- हर घर में रहने वालों की अमूमन एक-दूसरे से शिकायत हुआ करती है. सामान्यतः यह शिकायत स्वाभाव को लेकर होती है. पर एक बात स्वयं के लिए भी जानना आवश्यक है की जो शिकायत दूसरों से होती है वही दूसरों को आपसे हो सकती है.इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया जाये तो गिले-शिकवे की आदत ख़त्म हो जाती है. बतौर एक शायर:-     
·                                 " जब किसी से कोई गिला करना", सामने अपने आइना रखना."
· 
  कुछ अपनी सुनाएँ, कुछ दूसरों की सुने:- घर में सबका अलग-अलग स्वभाव होता है. कोई कम बोलना पसंद करता है कोई अधिक बोलना. हर व्यक्ति अपनी बात  को ही अधिक महत्व देना चाहता है, इसलिए दूसरे की बात ध्यान से सुनाने की आवश्यकता नहीं समझता  जिससे मामला एक तरफ़ा हो जाता है. विचारों में मतभेद भी हो सकते हैं पर आपसी तालमेल के लिए जरुरी है की कुछ अपनी कहें व कुछ दूसरों की सुने और सहमति से बात को किसी बिन्दू पर लाकर छोड़ें. बातचीत दिलचस्प हो जाएगी और घर का माहौल भी खुशगवार हो जायेगा.

काम के लिए हाथ बढ़ाएं:- घर में काम करने की बात को लेकर अक्सर शिकायत रहा करती है. किसी सदस्य को दूसरे का काम कम लगता है और स्वयं का अधिक, इससे तो अच्छा है कि मिल-जुल कर काम किया जाए, जिससे किसी एक ही व्यक्ति पर काम का बोझा अधिक न रहे. " साथी हाथ बटाना साथी रे " कि उक्ति पर अमल लेन पर 'घरघर बन जायेगा.
प्यार व आदर का खुलकर इजहार करें:- आपस में एक-दूसरे के लिए प्यार है, स्नेह है या फिर सम्मान है इसका खुलकर इजहार करें . ये छुपाने वाली चीजें नहीं किन्तु इनका उपरी दिखावा कदापि  करें . कार्य कि प्रशंसा करना भी एक तरीका है. एक-दूसरे को गिफ्ट देना भी प्यार के इजहार का एक प्यारा सा ढंग है. ' सरप्राइज गिफ्ट ' के क्या कहने! ये दिलों को नजदीक लाता है और पारिवारिक बंधन और अधिक मजबूत होते हैं.
घूमने-फिरने जाएँ:- परिवार के सदस्यों के साथ कभी-कभी बाहर भी जाना 'घर' को जीवन्त बनाये रखने के लिए बहुत जरुरी है. आउटिंग पर जाने का मतलब  घर के सदस्यों का एक साथ बैठना, खाना, बातचीत. हँसीं-मजाक करना. घर-परिवार कि समस्या से दूर आनंद के ये पल परिवार को और नजदीक ही लाते हैं. एक लम्बी ड्राइव, शानदार डिनर या फिर एक पिकनिक से जानदार आउटिंग कोई हो ही नहीं सकती और अगर ये सरप्राइजिंग हो तो मजा दुगुना हो जाता है. पर पहले ये जरुर जान लें कि कोई सदस्य किसी काम में मसरूफ तो नहीं, नहीं तो आपका सरप्राइज आपके लिए ही ' शॉकिंग सरप्राइज ' हो जाए. कभी-कभी एक सुंदर सी ड्रेस का उपहार खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है.
ये बातें परिवार-घर को 'तेरा-मेरा' से ' हमारा ' में बदल देतीं है. ऐसे ' हमारे-घर ' में एक शाम को काम से थककर हर इन्सान लौटकर आना चाहता है, जँहा कुछ लोग आपकी वापसी के इंतज़ार में अपनी पलकें बिछाए रहते हैं. शाम को घर लौटकर एक कप गरमा-गरम चाय के साथ दिनभर कि व्यस्तता को गपशप का चटपटी  बातों भरा नाश्ता सारे दिन कि थकान को दूर करने के लिए काफी होता है. पर शर्त यही है कि ' हो प्यारा-सा घर हमारा '.   
Veena Sethi.


गुरुवार, 2 अगस्त 2012

कुछ अनकहा सा ----प्यारा सा-एक घर हमारा


आइये मकान को घर बनायें----

 "घरऔर "मकाशब्द दो हैं पर अर्थ एक ही है अर्थात ' रहने की जगह'. और दोनों शब्दों में एक मूलभूत अंतर है. 'मकान' ईंट, रेत, सीमेंट से ढाला गया एक आकर होता है और 'घर' उसमें बसेरा करने वाले इंसानों से बनता है. दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएँ, कहीं भी रह आयें इन्सान  की पनाहगाह घर  ही होती है. 'मकान' तभी 'घर' होता है जब उसमें रहने वाले उसे सही मायनों में घर बनाना चाहते हों. कोई भी घर ' तेरा-मेरा घर' होने पर घर  नहीं बल्कि मकान बन जाता है. घर जब ' हमारा घर' बनता है तभी 'घर' सार्थक होता है .

'मकान' नहीं "घर "
हमारा घर हर आदमी का सपना होता है. पर उसे वह तभी पूरा कर सकता है, जब वह उसे अपनेपन से सराबोर कर दे. ये 'घर' परिवार के किसी एक सदस्य से भी नहीं बन सकता, बल्कि सबकी मिली-जुली कोशिशों एवं सहयोग से ही संभव है. आज के दौर में जिंदगी की इस आपाधापी में रिश्ते, जो कोमल पौधे की तरह होते हैं, को संभालकर और सहेज कर रखना और भी कठिन होता जा रहा है.एक घर को 'तेरा-मेरा' की जगह ' हमारा ' बनाना वास्तव में कठिन हो सकता है, असंभव नहीं. केवल कुछ एक बातों को फिर से याद करने की, उन्हें समझाने की जरुरत है. ये बातें हमें मालूम हैं, इन्हें सिखाने व समझाने की भी जरुरत नहीं.
 गिले- शिकवे का दौर खत्म हो:-- हर घर में रहने वालों की अमूमन एक-दूसरे से शिकायत हुआ करती है. सामान्यतः यह शिकायत स्वाभाव को लेकर होती है. पर एक बात स्वयं के लिए भी जानना आवश्यक है की जो शिकायत दूसरों से होती है वही दूसरों को आपसे हो सकती है.इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया जाये तो गिले-शिकवे की आदत ख़त्म हो जाती है. बतौर एक शायर:-     
·                                 " जब किसी से कोई गिला करना", सामने अपने आइना रखना."
· 
  कुछ अपनी सुनाएँ, कुछ दूसरों की सुने:- घर में सबका अलग-अलग स्वभाव होता है. कोई कम बोलना पसंद करता है कोई अधिक बोलना. हर व्यक्ति अपनी बात  को ही अधिक महत्व देना चाहता है, इसलिए दूसरे की बात ध्यान से सुनाने की आवश्यकता नहीं समझता  जिससे मामला एक तरफ़ा हो जाता है. विचारों में मतभेद भी हो सकते हैं पर आपसी तालमेल के लिए जरुरी है की कुछ अपनी कहें व कुछ दूसरों की सुने और सहमति से बात को किसी बिन्दू पर लाकर छोड़ें. बातचीत दिलचस्प हो जाएगी और घर का माहौल भी खुशगवार हो जायेगा.

काम के लिए हाथ बढ़ाएं:- घर में काम करने की बात को लेकर अक्सर शिकायत रहा करती है. किसी सदस्य को दूसरे का काम कम लगता है और स्वयं का अधिक, इससे तो अच्छा है कि मिल-जुल कर काम किया जाए, जिससे किसी एक ही व्यक्ति पर काम का बोझा अधिक न रहे. " साथी हाथ बटाना साथी रे " कि उक्ति पर अमल लेन पर 'घरघर बन जायेगा.
प्यार व आदर का खुलकर इजहार करें:- आपस में एक-दूसरे के लिए प्यार है, स्नेह है या फिर सम्मान है इसका खुलकर इजहार करें . ये छुपाने वाली चीजें नहीं किन्तु इनका उपरी दिखावा कदापि  करें . कार्य कि प्रशंसा करना भी एक तरीका है. एक-दूसरे को गिफ्ट देना भी प्यार के इजहार का एक प्यारा सा ढंग है. ' सरप्राइज गिफ्ट ' के क्या कहने! ये दिलों को नजदीक लाता है और पारिवारिक बंधन और अधिक मजबूत होते हैं.
घूमने-फिरने जाएँ:- परिवार के सदस्यों के साथ कभी-कभी बाहर भी जाना 'घर' को जीवन्त बनाये रखने के लिए बहुत जरुरी है. आउटिंग पर जाने का मतलब  घर के सदस्यों का एक साथ बैठना, खाना, बातचीत. हँसीं-मजाक करना. घर-परिवार कि समस्या से दूर आनंद के ये पल परिवार को और नजदीक ही लाते हैं. एक लम्बी ड्राइव, शानदार डिनर या फिर एक पिकनिक से जानदार आउटिंग कोई हो ही नहीं सकती और अगर ये सरप्राइजिंग हो तो मजा दुगुना हो जाता है. पर पहले ये जरुर जान लें कि कोई सदस्य किसी काम में मसरूफ तो नहीं, नहीं तो आपका सरप्राइज आपके लिए ही ' शॉकिंग सरप्राइज ' हो जाए. कभी-कभी एक सुंदर सी ड्रेस का उपहार खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है.
ये बातें परिवार-घर को 'तेरा-मेरा' से ' हमारा ' में बदल देतीं है. ऐसे ' हमारे-घर ' में एक शाम को काम से थककर हर इन्सान लौटकर आना चाहता है, जँहा कुछ लोग आपकी वापसी के इंतज़ार में अपनी पलकें बिछाए रहते हैं. शाम को घर लौटकर एक कप गरमा-गरम चाय के साथ दिनभर कि व्यस्तता को गपशप का चटपटी  बातों भरा नाश्ता सारे दिन कि थकान को दूर करने के लिए काफी होता है. पर शर्त यही है कि ' हो प्यारा-सा घर हमारा'.
वीणा सेठी 

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