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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

यादें.4...............(बात बाकि है.)

जागते रहो.....................



दिसम्बर की ठिठुरा देने वाली रात में ख़ामोशी को चीरती एक आवाज ने गहरी नींद से जगा दिया। रात में गश्त लगाने वाले चौकीदार की आवाज " जागते रहो..........." ने वाकई जगा दिया था । सारी रात इन्ही दो शब्दों पर केन्द्रित हो कर रह गई थी पिछले २००० सालों से कोई न कोई चौकीदार इसी तरह से आवाज लगा कर जगाने की कोशिश कर रहा है और हमरी नींद है की टूटने का नाम नहीं ले रही। क्या वाकई हम जग चुके हैं.


लघु कथा -एक बात ..............1

जागते रहो...

दिसम्बर की ठिठुरा देने वाली रात में ख़ामोशी को चीरती एक आवाज ने गहरी नींद से जगा दिया। रात में गश्त लगाने वाले चौकीदार की आवाज " जागते रहो..........." ने वाकई जगा दिया था । सारी रात इन्ही दो शब्दों पर केन्द्रित हो कर रह गई थी पिछले २००० सालों से कोई न कोई चौकीदार इसी तरह से आवाज लगा कर जगाने की कोशिश कर रहा है और हमारी नींद है की टूटने का नाम नहीं ले रही। क्या वाकई हम जग चुके हैं...?
उस ठिठुरती रात के अँधेरे में उस चौकीदार की आवाज फिर से सन्नाटे को चीरती हुई फिजा में गूंजने लगी ,'जागते रहो....."



शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

कहानी......नारी-1

मेरा घर कहाँ है????....................

हमारी काम वाली बाई का नाम 'मिनी' है। उसकी आवाज में बच्चों की सी मासूमियत है जब बोलना शुरू कराती है तो रुकने का नाम ही नहीं लेती। बर्तन मांजने बैठती है बातों में इतना खो जाती है कि एक ही बर्तन को चमकाने में लगी रहती है तो उसे टोकना पड़ता है ,'मिनी अब दूसरा बर्तन भी मांज क्या एक ही बर्तन लेकर सारा दिन बैठी रहेगी?."और जैसे वो सोते से जग जाती और जल्दी जल्दी हाथ चलने लगती।
मिनी जैसे ही दरवाजा खटखटाती है पता चल जाता है की मिनी आई है पर आज जब मिनी आई तो हमें उसके आने का पता ही नहीं चला। मिनी आँगन में आकर चुपचाप बर्तन धोने लगी , ये देखकर मैंने चुटकी ली, " क्या बात है! आज तेरा टेप बंद है"। इतने पर भी वह कुछ नहीं बोली। मैंने फिर उसे छेड़ने वाले अंदाज में पूछा तो उसने जैसे ही अपना सर ऊपर उठाया तो देखा उसकी आँखों में आंसू थे। भरी आँखों से उसने कहा, " दीदी! रात को मेरा आदमी बाहर से फिर पी कर आया, तो मैंने उससे कहा की इतनी मत पिया करो, बच्चे भी पूछते हैं , उनपर भी गलत असर पड़ेगा"। तो मेरे आदमी ने मुझपर हाथ उठा दिया और मारते हुए बोलने लगा, ' साली समझती क्या है अपने आप को ! मै अपने घर से निकाल दूंगा '। मिनी मुझसे सवाल कर रही थी, " बताओ न दीदी ! मेरा घर कहाँ है??"

मिनी रोये जा रही थी और उसकी आँखों में एक सवाल तैर रहा था आखिर उसका घर कौनसा है? उसका घर कंहा है???।

ये एक ऐसा सवाल है जो आज भी इस देश की ९९.९९ % नारियाँ स्वयं से कर रही हैं।

क्या इसका जवाब आपके पास है?????????????..................



 




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