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मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

हंसिकाएं.....1

पति-पत्नी...1

पति से बोली पत्नी:
शादी के पहले मेरा फिगर;
था बिल्कुल कोक की बोतल .
यह सुन पति बोला:
डार्लिंग! ठीक कहती हो;
पहले था वह 300 एम् एल,
अब है डेढ़ लीटर.





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पति-पत्नी ...2

पत्नी बोली पति:
डार्लिंग काश...!
तुम होते अदरक;
मै तुम्हे कूटती जीभर .


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पति-पत्नी...3

पत्नी बोली पति से:
तुम २००० का नोट हो;
ख़ुशी से बोला 'कैसे?'
न तुम फेंके जा सकते हो,
न चेंज हो सकते हो.

(वीणा सेठी)

सभी चित्र- google.com से धन्यवाद सहित उधार

सोमवार, 5 अप्रैल 2010

कहानी..........नारी-5(ममता)

वह भी ममता से भरी थी..................

वह उम्रदराज हो चली थीउसने विवाह नहीं किया था, यही लोगों के लिए कौतुहल का विषय थालोगों के लिए वह अक्सर चर्चा का विषय हो जाया करती थीउसमे कोई कमी नहीं थीवह सुन्दर थी, काफी पढ़ी -लिखी थी और अमीर परिवार की थी, ये बहुत कम लोग जानते थे की उसने जिदगी में काफी उच्चे लक्ष्य अपने लिए निर्धारित किये थे पर उसकी बात को उसके माता-पिता समझने के लिए तैयार ही नहीं थे नतीजा इस रस्साकशी में उसके सपने भी टूट गए और वह उम्र में इतनी आगे निकल गई की उसकी शादी भी हो सकीउसे बच्चों से बहुत प्यार था पर उसकी भावना को कोई समझ नहीं सका, उस दिन वह एक स्कूल के करीब से निकली तो गेट पर खड़े एक साल के बच्चे को रोते हुए देखा तो वह उसे चुप कराने लगी इतने में उस बच्चे की माँ गई और उसने हल्ला मचा दिया और इस तरह चिल्लाने लगी मानो वह उसके बच्चे को चुरा के ले जा रही हो और 'वह' अपराधी मन ली गई, गर कोई उसकी आँखों में झांक सकता तो पाता की उसकी आँखें नाम थी और पूछ रही थी मानो मेरा अपराध क्या था- गर उसका विवाह नही हुआ तो क्या उसमे ममता नहीं थी-------------- उसकी आँखें मानो कह रही थीं की हर औरत में ममता कुदरत की तरफ से भरी होती है उसके लिए तो माँ बनना जरुरी है और ही शादी ------------------..





बुधवार, 3 मार्च 2010

कहानी..............नारी-3

मिनी देर से क्यूँ आई.............................??

मिनी आज काम पर बहुत देर से आई। तब तक मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसके घर में घुसते ही मै जोरसे चिल्लाई- ' आज तूने फिर देर कर दी ?', मिनी ने बड़े ही मुस्कराते अंदाज में कहा, ' दीदी! आज पिंकी के पापा नेमुझे २०० रुपये दिए हैं।' क्यों ? मेरी निगाहों में सवाल तैर गया। मिनी अपनी ही धुन में थी, ये रुपये पिंकी के पापाने मंगल सूत्र खरीदने को दिये हैं। वो आजकल गारंटी वाले आते हैं ना जो छः महीने बाद आधे पैसे में वापस ले लेतेहैं।' मिनी अपनी ख़ुशी में मगन मुझे बता रही थी और मैं उसकी कल की कही बात पर सोच रही थी।
कल मिनी ने बताया था कि उसकी शादी को नौ साल हो गए हैं पर आज तक उसके पति ने उसे एक भी सलवार सूटखरीदकर नहीं दिया। और जब कल उसने अपने पति से १५० रुपये सूट खरीदने के लिए मांगे तो वह उस पर येकहते हुए बरस पड़ा कि बैंक तेरे बाप खुलवा के दिया है जो मै तुझे सूट लेकर दूँ। मिनी दूसरों कि उतरन पर ही कमचला रही थी। उसी पति ने आज उसे मंगल सूत्र के लिए २०० रुपये देने में एक पल की देरी नहीं की। क्योंकि वोमंगल सूत्र उसके नाम पर उसकी पत्नी को मिलने वाला एक पहचान पत्र था जो ये बताता है की वह उसकी मल्कियत है.


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