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शनिवार, 23 मार्च 2013

.कविता .

अभी चलते रहना चाहता हूँ.....




एक कदम और आगे
आ गया हूँ मै.
पगडण्डी वही
दिशा वही है.
कारवां आगे बढ़ चला है;
मै भी उसके साथ
एक और कदम आगे
बढ़ा रहा हूँ.
मंजिल दूर सही;
पर
मै जनता हूँ
जो मजा
सफ़र में है;
वह
मंजिल तक पहुँचने में कहाँ.......!
अभी सफ़र जारी रहेगा;
ये है मुझे पता,
और
मै चलते रहना चाहता हूँ;
चलते चले जाना चाहता हूँ,
जिंदगी के
आखरी छोर तक.........

वीणा सेठी  

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