जीवन-मृत्यु
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1
पेड़ पे ऊगी कोंपल;
बन हरा पत्ता,
फिर मुरझाया;
डाल से टूट गया.
2
मुठ्ठी में भरी रेत;
धीरे से फिसली
और मुठ्ठी रीत गई.
3
खेत में लहलहाई
फसल;
पककर कटी,
खेत खाली कर गई.
4
पानी का बुलबुला;
धीरे से उठ,
सतह पर आया;
फिर विलीन हो गया.
5
भोर में;
आसमां से पत्ते पर गिरी
ओस की बूंद,
सूरज के सर चढ़ते ही,
हवा हो गई.
वीणा सेठी
