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शनिवार, 17 जुलाई 2010

कहानी-8.........(दोराहे पर नारी..२)


 नारी दोराहे पर-----------२ 


मेरी एक परिचित की शादीशुदा लडकी(वर्षा) की दो पुत्रियाँ हैं और बड़ी तो लगभग १४ साल की हो चुकी है औरछोटी लगभग साल की है, एकल परिवार है, वर्षा ने अपने पति से लड़-झगड़कर अपनी मन के घर के पास ही किराये का घर ले लिया है और वो हर रोज अपनी माँ के घर में अपना अधिक से अधिक समय गुजार देती है और अब उसकी माँ के कहने पर उसके अंदर पुत्र की चाह बलवती होने लगी है। माँ के बार-बार कण भरने से अब वहतीसरी बार गर्भवती होने को तैयार हो गई है , माँ चाहती है की उसकी बेटी के ख़ानदान का कोई नामलेवा हो औरबेटी की माँ होने का रुतबा भी कुछ अलग होता है, इसी बात की पुनरावृति होने के कारण वर्षा के मन में भी कही घरेपैठ गया है की बाते की माँ होना जरुरी है। जबकि इसके पहले उसकी दोनों बेटियां मेजर ऑपरेशन से हुई थीं और डॉक्टर ने उसे तीसरी बार माँ बनाने से मना कर दिया था क्योंकि इससे उसकी जान को खतरा था..............पर अब वर्षा उस खतरे की जद में चुकी थी और पुनः माँ बनाने की आशा की ओर अग्रसर हो कर गर्भ धारण कर चुकीहै................. उसके डॉक्टर ने वर्षा और उसके पति संजय को काफी फटकारा और उन्हें आने वाले खतरे आगाह कर अबोर्शन करवाने की सलाह दी पर वे उसकी अनदेखी कर आने वाली संतान पुत्र जिसका वे सोनोग्राफी द्वाराजाँच करवा चुके हैं का बहुत ख़ुशी से इंतजार कर रहे हैं, वर्षा की भाभी ने उसे खतरे से आगाह करवाया तो उसने उसेबहुत बुरी तरह से लताड़ दिया , वर्षा की भाभी हर्षा शाम को ऑफिस से लौटते समय जब शाम को मिलने आई तो उसने सारी बात बताई , वो कहने लगी दीदी मैंने वर्षा को बहुत समझाने की कोशिश की तो बजाये मेरी बात पर गौर करने उलटे मुझे ही जली कटी सुना दी, हर्षा की आँखों में आंसू थे ,वो कह रही थी," वर्षा ने और मेरी सास दोनों कहने लगी की.................. मै वर्षा से जलती हूँ क्योकिं मै बेटे की माँ नहीं बन सकती..................।" हर्षा की एक हीबेटी है और वो दुबारा माँ नहीं बन सकती। हर्षा की आखोँ में आसूं थे और मेरी सोच सदियों पुरानी बात की घूम रहीथी की औरत ही औरत को नहीं समझती और एक दूसरे की दुश्मन बन जाती हैं. 


शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

कहानी 7..........(दोराहे पर नारी)

 दोराहे पर नारी------------------------१


मेरी एक सहेली हर्षा एक कंपनी में कंप्यूटर ओपेरटर है और महीने में लगभग अच्छा-खासा कम लेती है। उसकी - साल की बेटी है। हर्षा का पति उससे कम कमाता है और हर्षा ने अपनी पगार घर में कम बता के रखी है। हर्षा घर के बहार की दुनिया में कदम नहीं रखना चाहती थी पर पति की कम कमाई के तानों ने उसे घर से बाहर कदम रखने को मजबूर कर दिया। बेटी के जनम के पहले भी वो एक फिरम में बतौर क्लर्क कम करती थी। किन्तु उसकी नौकरी उसकी सास ने छुड़वा दी थी ये कहकर की उससे घर का कम नहीं होता। अब बेटी के जन्म के बाद उसकी परवरिश के के लिए पैसों की तंगी का रोना उसकी सास ने पुनः शुरू कर दिया तो हर्षा ने एक बार फिर से नौकरी करने की सोची और अब वह कंप्यूटर ओपरेटर है। कहने को तो वो आर्थिक रूप से स्वतंत्र है पर उसकी कमाई उसे अभी भी सास के हाथ में देनी पड़ती है जिसमे से उसकी सास उसे महीने की पॉकेट मनी के रूप में २००-३०० रुपये दे देती है।
हर्षा को आब नौकरी करते हुए - साल हो चुके हैं और वह आर्थिक रूप से अपनी स्थिति से संतुष्ट है। किन्तु पिछले कुछ दिनों से उसकी सास ने पते की रट लगनी शुरू कर दी है। जिससे हर्षा मानसिक तनाव से गुजार रही है पूर्व में जब हर्षा जब एक बार और गर्भवती हुई थी तब उसकी सास ने दूसरे बच्चे की परवरिश के लिए पैसों की कमी का रोना रोकर उसका गर्भपात करवा दिया था, किन्तु अब फिर से उनकी पोते की इच्छा बलवती होने लगी और यही बात हर्षा के लिए परशानी का सबब बनती जा रही थी, शाम को ऑफिस से लौटते जब वह मिलने आयर तो बोली, क्या करूँ दीदी? मै तो शिखा (बेटी का नाम) के जन्म से ही खुश हूँ.............. और अब मम्मी ने पोते की रट लगनी शुरू कर दी है, अभी तो मै अच्छे से कम ले रही हूँ................. और शिखा की हर मांग को पूरा कर पाती अगर दुबारा बच्चे के बारे में सोचा तो नौकरी तो हाथ से जाएगी साथ में दुबारा ऐसी नौकरी मिलेगी कहना मुश्किलहै?............................. क्या करू.........................?, मैंने उसे कहा की उसने शैली (पति का नाम) बात की ? इस पर हर्षा ने बताया, " मैंने इनसे बात की तो वो चिढ़कर बोले की मम्मी बड़ी हैं और समझदार हैं , उन्होंने कुछ सोच कर ही कहा होगा, ऐसा कहकर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लिया, अब मै क्या करू.................? कुछ समझ नहीं रहा?" हर्षा के चारे पर लाचारी के भाव थे और मेरी सोच वाही घूम रही थी की क्या वाकी आर्थिक आजादी को नारी की वास्तविक आजादी समझने की कही हम भूल नो नहीं कर रहे.........?

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